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Sunday, October 3, 2010

ऐसे पैदा करें खुद में जादुई आकर्षण

क्या आप इसलिए परेशान हैं क्योंकि आपका व्यक्तित्व आकर्षक नहीं है। तो आप की समस्या का आसान निदान हमारे पास है। क्या आप जानते हैं सम्मोहन सिर्फ दूसरों पर ही नहीं आप अपने आप पर भी चला सकते हैं। आप खुद को सम्मोहित कर के अपने शरीर में ऐसी चुम्बकीय शक्ति पैदा कर सकते है। दूसरों को सम्मोहित करने के लिए यह आवश्यक है कि उसे आप पर विश्वास हो। वैसे ही खुद को सम्मोहित करने के लिए सबसे ज्यादा जरुरत है आत्मविश्वास की। जिस तरह योग प्राणायाम से व्यक्ति सम्मोहनकर्ता बन सकता है। वैसे ही अपनी अंदर की चेतना को ध्यान व त्राटक के माध्यम से आप भी अपने शरीर में चुम्बकीय आकर्षण पैदा कर सकते हैं। विधि-:इसके लिए आपको त्राटक जो ध्यान की एक विधा की प्रतिदिन प्रेक्टिस कि जरुरत होती हैं।इसमें पलंग पर आराम से लेटकर अपने मन और मस्तिष्क को पूरी तरह शिथिल कर आंतरिक मन को क्रियाशील बनाकर उसे पूरी तरह एकाग्र बनाए। पूरी कोशिश करें कि आप शुरुआत में किसी अन्य के बारे में ना सोचे ,जो भी सोचे अपने बारे में ही सोचे और सकारात्मक सोचे। धीरे-धीरे यह कोशिश करें कि मन में कोई विचार ना आए और अपने ध्यान को आज्ञा चक्र जो कि दोनो आइब्रोज के बीच होता है पर अपना पूरा ध्यान लगाने का प्रयास करें व श्वास पर ध्यान केन्द्रित करे। सुबह बिस्तर से उठने से पहले भी पांच मिनट आज्ञा चक्र को देखें।-दिन में या रात में आप कहीं भी हो हर आधे घंटे मे अपनी सोच का आत्म अवलोकन करें और ध्यान रखे की किसी भी तरह के नकारात्मक विचार मन में ना आए।अपने आप में जादुई चुंबकीय आकर्षण पैदा किया जा सकता है।

चमत्कारी असर है ऊँ की ध्वनि में

चिकित्साशास्त्री,शरीर विज्ञानी,ध्वनि विज्ञानी और अन्य भौतिक विज्ञानी ओम को लेकर आज बड़े आश्चर्यचकित हैं। इंसानी जिंदगी पर किसी शब्द का इतना अधिक प्रभाव सभी के आश्चर्य का विषय है। एक तरफ ध्वनिप्रदूषण बड़ी भारी समस्या बन चुका है, वहीं दूसरी तरफ एक ऐसी ध्वनि है जो हर तरह के प्रदूषण को दूर करती है। वो ध्वनि है ओम के उच्चारण से उत्पन्न ध्वनि। जरा देखें ऊँ के उच्चारण से क्या घटित और परिवर्तित होता है:-- ऊँ की ध्वनि मानव शरीर के लिये प्रतिकुल डेसीबल की सभी ध्वनियों को वातावरण से निष्प्रभावी बना देती है।- विभिन्न ग्रहों से आनेवाली अत्यंत घातक अल्ट्रावायलेट किरणें ओम उच्चारित वातारण में निष्प्रभावी हो जाती हैं।- ऊँ का उच्चारण करने वाले के शरीर का विद्युत प्रवाह आदर्श स्तर पर पहुंच जाता है।- इसके उच्चारण से इंसान को वाक्सिद्धि प्राप्त होती है।- अनिद्रा के साथ ही सभी मानसिक रोगों का स्थाई निवारण हो जाता है।- चित्त एवं मन शांत एवं नियंत्रित हो जाते हैं।

ऐसे देगा पैसा आपके दरवाजे पर दस्तक......

क्या आप चाहते हैं कि आपके जीवन में भी कुछ ऐसा हो जाए कि हर तरफ से धन कि बारिश होने लगे लक्ष्मी आपके दरवाजे पर दस्तक दे और आपके जीवन से सारी आर्थिक परेशानियां खत्म हो जाए तो नीचे लिखे इस उपाय को अपनाकर आप भी अपने जीवन कि धन से जुड़ी सारी समस्याओं से निजात पा सकते हैं।
- घर के मुख्य दरवाजे पर कुमकुम से स्वास्तिक बनाएं और बासमती चावल की ढेरी पर एक सुपारी में कलावा बांध कर रख दें। धन का आगमन होने लगेगा।
- सुबह शुभ मुहूर्त में एकाक्षी नारियल का कामिया सिन्दूर कुमकुम व चावल से पूजन करें धन लाभ होने लगेगा।

कैसे बढ़ाएं बैंक बैलेंस?

बैंक में पैसा जमा करवाते समय हर व्यक्ति यही सोचता है कि उसके खाते में हमेशा एक बड़ा अमांउट रहे, कभी भी उसका बैंक बैलेंस जीरो न हो। जीवन में आने वाले उतार - चढ़ाव ऐसा होने नहीं देते, कभी बैंक बैलेंस बढ़ता है तो कभी घटता है। अगर आप चाहते हैं कि आपका बैलेंस हमेशा बढ़ता रहे तो आप निम्न उपाय कर सकते हैं-
1- जब भी आप बैंक में पैसा जमा करवाएं तो प्रयास करें कि पश्चिम मुखी होकर ही कार्य करें ।
2- मानसिक रूप से निम्न मंत्र का जाप करें- ऊं श्रीं श्रीं श्रीं
3- यदि इससे भी लाभ नहीं हो तो शुक्रवार को तुलसी के पौधे के समक्ष गाय के घी का दीपक जलाएं व ऊपर दिए गए मंत्र का जाप करें इस उपाय से आपके खाते में धन सदैव बढ़ता रहेगा।

क्या करें अगर पैसा नहीं टिकता?

अक्सर सुनने में आता है कि घर में कमाई तो है लेकिन पैसा टिकता नहीं। पैसा आता तो है पर चला जाता है, पता ही नहीं चलता। कितनी ही कोशिश करें पर घर मे बरकत नहीं रहती। यदि आप भी इसी समस्या से परेशान हैं तो नीचे लिखे उपाय को अपनाकर अपनी इस परेशानी से छुटकारा पा सकते हैं।

- जब भी आप घर में अनाज पिसवाएं तो उसमे ग्यारह पत्ते तुलसी के साथ ही दो पत्ती केसर डाल कर, उसमें से थोड़े से अनाज को रात को निकालकर मंदिर में रखकर सुबह उस अनाज को सारे अनाज में मिलाकर पिसवा लें। इस प्रयोग से आपकी समस्या का शीघ्र ही समाधान हो जाएगा और घर में भी बरकत रहने लगेगी।

Saturday, October 2, 2010

क्या आदमी उड़ सकता है ?...

हर आदमी जीवन में एक बार तो यह कल्पना करता ही है कि काश वह गायब हो सकता या हवा में उड़ सकता। सोचने में यह बात भले ही बच्चों जैसी लगे लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि यह संभव है। कुछ ऐसी तंत्र सिद्धियां होती हैं जिससे हम आसानी से हवा में उड़ भी सकते हैं, जब इच्छा हो तब गायब भी हो सकते हैं। हालांकि ये सिद्धि पाना इतना आसान नहीं है लेकिन अगर मेहनत की जाए तो इसे पाया भी जा सकता है।

आइए जानते हैं क्या है यह सिद्धि:-

मंत्र विधि

इस सिद्धि के लिए मंत्र साधना सिर्फ शमशान में बुझी हुई चिता पर आसन लगाकर की जाती है। शमशान में जाने से पहले यह भी जरुरी है कि साधक नदी में स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद साधक साधना आरंभ कर सकता है। इसकी मंत्रोक्त साधना बहुत कठिन होती है। यह साधना 120 दिनों तक पूर्ण विधि-विधान के साथ रोज लगभग छ: घंटों तक निम्र मंत्र के माध्यम से की जाती है।

मंत्र- ऊं क्षं क्षं क्षं आकाशचारी शून्य शृंग पूर्णत्व क्षं क्षं क्षं फट् स्वाहासाधना के पश्चात घर जाने से पूर्व भी साधक को स्नान करना अनिवार्य है। ऐसा माना जाता है कि पूरे विधि से इस साधना को संपन्न करने के बाद आकाश से एक पारद गुटिका प्राप्त होती है और उस गुटिका को दाहिनी भुजा पर बांधकर साधक अपनी इच्छा से गायब हो सकेगा और मनचाहे स्थानों पर विचरण कर सकेगा।

सफलता कारक मंत्र

भौतिक संपन्नता का क्षेत्र हो या आध्यात्मिक उन्नति का कामयाबी उसे ही मिलती है जिसमें उसे पाने की योग्यता और क्षमता होती है। बल या शक्ति उस समग्र और सम्मिलित क्षमता को कहते हैं जिसमें तीनों बल यानि धन, ज्ञान और बाहु बल शामिल हो। दुनिया में सर्वाधिक शक्तिशाली वही है जो जिसके पास तीनों बलों का पर्याप्त संचय यानि कि संग्रह हो। प्राचीन दुर्लभ शास्त्रों में कुछ ऐसे विलक्षण मंत्र दिये गए हैं जिनको सिद्ध करके आप जिंदगी के हर क्षेत्र में भरपूर कामयाबी प्राप्त कर सकते हैं। ये मंत्र पूरी तरह से ध्वनि विज्ञान के आधार पर कार्य करते हैं:-

- धन बल के लिए: कमलासने विद्महे, विष्णु प्रयाये धीमही, तन्नौ लक्ष्मी प्रचोदयात्।
- ज्ञान बल के लिए: हंसवाहिनी विद्महे, ज्ञान प्रदानाय धीमही, तन्नौ सरस्वती प्रचोदयात्।
- बाहु बल के लिए: नृसिंहाय विद्महे, वज्रनखाय धीमही, तन्नौ नृसिंह प्रचोदयात्।

जप के नियम:
ऊपर वर्णित अचूक मंत्रों का जप प्रारंभ करने से पूर्व कुछ सरल किंतु अनिवार्य नियमों पर एक नजर-- ध्यान रहे की मंत्र जप की सारी सफलता एकाग्रता और श्रद्धा पर निर्भर होती है।- पूर्व या उत्तर दिशा में मुख करके पद्मासन में कमर सीधी रख कर बैठें।- तीनों, कोई दो या आवश्यकता के अनुसार मात्र एक मंत्र का जप करने से पूर्व भी अनिवार्यरूप से तिगुनी मात्रा में गायत्री जप अवश्य करें।- यदि ज्ञान बल वृद्धि के मंत्र का एक माला जप करना हो तो उससे पूर्व तीन माला गायत्री मंत्र की माला करना चाहिए। यानि 1:3 का ही हो।- मंत्र जप पूर्व बाहरी एवं आंतरिक पवित्रता के बाद प्रारंभ करें।- ध्यान रहे मंत्र जप सूर्योदय से पूर्व ही समाप्त हो जाना चाहिए।